Saturday, November 23, 2019

Will कैसे बनाये




Will कैसे बनाये
वसीयत को इच्छा पत्र भी कहा जाता हे, और आपके स्वामित्व कि सम्पति आप किसे देना चाहते हे यह आपकी इच्छा पर निर्भर करता है, इस कारण यह जरुरी हों जाता है कि आपकी अंतिम इच्छा पूर्णतया स्पष्ट हो ताकि आपकी मृत्यु पश्चात आपकी चल-अचल संपत्ति आप जिसे देना चाहते है वह उसका बिना किसी भय बाधा के उपयोग कर सके इसके लिए आवश्यक है कि वसीयत बड़ी सावधानी और सम्पूर्ण क़ानूनी आधारो पर निष्पादित होनी चाहिए उसमे आपकी सम्पति का स्पष्ट विवरण दर्ज हो, आपकी इच्छा का स्पष्ट विवरण दर्ज हो
वसीयत एक विधिक दस्तावेज है जिसमें विलकर्ता द्वारा अपनी चल - अचल संपत्ति अपने विधिक उत्तराधिकारी या अन्य आपके नजदीकी व्यक्ति में बांटी जाती है।
वसीयतकर्ता को यह अधिकार होता है कि वह अपने जीवनकाल में कभी भी वसीयत को निरस्त कर सकता है या नई वसीयत निष्पादित कर सकता है लेकिन यह ध्यान रखने योग्य है कि यदि आप द्वारा पूर्व में वसीयत निष्पादित करी हुई है और आपने जिसके हक में वसीयत करी और आपका उसे अपनी सम्पति देने का मन बदल गया या आपके अनुरूप आचरण नहीं कर आपको हैरान परेशान कर रहा है तो नई वसीयत में पूर्व कि वसीयत को निरस्त करने का कारण अवश्य दर्ज करे
वसीयत करने का सबसे मह्त्वपूर्ण लाभ आपकी मृत्यु पश्चात आपके विधिक वारिसान के मध्य आपकी सम्पति का राजी ख़ुशी बटवारा, कोर्ट केस से मुक्ति और आपकी सम्पति का  आपकी इच्छा अनुसार उपयोग
वसीयत के लिए यह बिल्कुल जरुरी नहीं कि वह आपके वारिसों के हक में ही कि जाये आप अपनी संपत्ति किसी मंदिर,धार्मिक संस्था, सामजिक संस्था, या किसी को भी जरिये वसीयत दे सकते है
वसीयत बनाने सबंधी कानून Indian succession Act 2(b) वसीयत को define करता है। वसीयतकर्ता अपनी संपत्ति का बंटवारा कैसे करना चाहता है तथा उनका वारिस कौन होगा।

जिन चीजों की वसीयत हो सकती है-

व्यक्ति खुद की कमाई किसी भी चल अचल संपत्ति की वसीयत कर सकता है।
मुस्लिम धर्म के अलावा हर भारतीय पर भारतीय उत्तराधिकारी अधिनियम 1925 लागु होता है।


वसीयत करने का तरीका

पहले के समय में हम सयुक्त परिवार में रहते थे और हमारे बुर्जुग अपनी इच्छा सादे कागज पर लिख दिया करते थे या मौखिक अंतिम इच्छा बता दिया करते थे लेकिन आज के समय में कोई किसी पर विश्वास नहीं करता और ही किसी के पास इतना समय है कि वो आपकी मर्त्यु पश्चात आपके परिवार का विवाद निपटाने के लिए अपना समय जाया करे इसलिए जरुरी है कि आपकी वसीयत आप किसी भी रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर्ड करवाए और उसके गवाह भी ऐसे हो जो आपकी मर्त्यु पश्चात होने वाले विवाद में गवाह बन कर आपकी अंतिम इच्छा/ वसीयत के सम्बन्ध में गवाही दे सके या मध्यस्त बन सके।

वसीयत कौन बना सकता है

वसीयतकर्ता का मानसिक संतुलन सही हो, वह सोचने समझने कि स्थिति में हो, जिस सम्पति कि वसीयत निष्पादित कर रहा है उसे करने का अधिकार हो, किसी नशे पते या दबाव में नहीं हो और वसीयत के हर शब्द का अर्थ उसे पता हो

वसीयत बनाते समय ध्यान देने योग्य बातें

यदि आप नहीं वसीयत बना रहे हो तो उसमें यह दर्ज करें कि आपके द्वारा बनाई गई पुरानी वसीयत को आप रद्द कर रहे हैं। बनाई गई वसीयत को रजिस्टर्ड कराना आवश्यक नहीं होता परंतु मृत्यु के बाद वसीयत में कोई गड़बड़ी ना हो इसके लिए वसीयत registered कराई जा सकती है। गवाहों के साथ सबरजिस्ट्रार के ऑफिस वसीयत को रजिस्टर्ड करवाया जा सकता है। वसीयत करने के बाद उसमें हस्ताक्षर, अंगूठे का निशान तथा दो गवाहों के हस्ताक्षर करने होंगे। पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि जिन लोगों को आप वसीयत कर रहे हैं वह गवाह नहीं बन सकते। वसीयत करने वाले पहले यदि वसीयत पाने वाले की मृत्यु हो जाती है तो वसीयत दुबारा बनानी होती है।

किस-किस चीज की कर सकतें हैं वसीयत
आप अपनी खुद की कमाई हुई अचल संपत्ति, जैसे जमीन, मकान, दुकान, खेत आदि की भी वसीयत कर सकते हैं। वहीं जो संपति आपके नाम है, उसी की ही वसीयत की जा सकती है।

गवाह की मौत होने पर क्या करें।
अगर वसीयत करने वाले से पहले किसी गवाह की मौत हो जाए तो वसीयत दोबारा बनवानी चाहिए।

वसीयत किसी भी language में किया जा सकता है

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