Sunday, December 1, 2019

क्या आपके पिता की संपत्ति में आपका अधिकार है?

क्या आपके पिता की संपत्ति में आपका अधिकार है?


भारतीय हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (हिन्दू सक्सेशन एक्ट) , 1956 में सम्पति के अधिकार का उल्लेख किया गया है कि उत्तराधिकारी कोन होगा किसका कितना हक रहेगा और उत्तराधिकार का क्रम क्या रहेगा इसी अनुसार संम्पति का विभाजन होता है यदि पिता का स्वर्गवास बिना वसीयत किये हो जाता है तो एक बेटे बेटी एवं पत्नी का अपने पिता/पति की स्वार्जित संपत्ति पर वारिस के रूप में पहला अधिकार होता है और उसी अनुपात में संपत्ति का विभाजन होता है यदि पुत्रो या पुत्रियों में से किसी का निधन हो जाता है तो उसके बच्चो का पिता की समाप्ति में अन्य हिस्सेदार के अनुरूप ही (पिता के हिस्से अनुसार )हिस्सा रहेगा एवं पिता के निधन के पश्चात उनकी पत्नी द्वारा अपने हिस्से की वसीयत, बेचान, गिफ्ट, हकत्याग नही किया है तो वह संपत्ति पुत्र और पुत्रियों में बराबर विभाजित होगी।

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पैतृक संपत्ति के मामले में

हिंदू कानून के अनुसार, एक व्यक्ति को जन्म के साथ ही पैतृक संपत्ति में अपने हिस्से का अधिकार मिल जाता है। पैतृक संपत्ति वह होती है जो पुरुष वंश की चार पीढ़ियों को विरासत में मिलती है। संपत्ति को दो शर्तों के आधार पर पैतृक माना जाता है - अगर पिता को उनके पिता से, मतलब दादा  से उनके देहांत के बाद विरासत में मिली हो ; या दादा के जीवित होते हुए भी उनके पैतृक संपत्ति का बँटवारा करने से विरासत में मिली हो । अगर पिता को संपत्ति दादा से उपहार के रूप में ली हो, तो वह पैतृक संपत्ति नहीं मानी जाती है।

बेटा अपने पिता  के जीवित रहते हए भी पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा माँग सकता  है। किसी भी सूरत में, आवेदक को संपत्ति में अपने हिस्से पर हक़ साबित करना होता है। हालाँकि, अधिनियम सौतेले बेटे ( माता-पिता के मृतक साथी या किसी दूसरे साथी का बेटा, या इस तरह के कुछ मामलों में ) को पहला वारिस नहीं मानता।  

कुछ मामलों में, अदालत सौतेले बेटे को पिता की प्रॉपर्टी विरासत में लेने की अनुमति देती है। उदाहरण के लिए, बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा संबोधित एक मामले में, आवेदक एक मृत हिंदू महिला का उसके पहले पति से बेटा था। महिला को अपने दूसरे पति से प्रोपर्टी विरासत में मिली थी,  जिसका उसकी पत्नी के अलावा कोई वैध वारिस नहीं था। अदालत ने सौतेले बेटे के दावे को सही ठहराया और घोषित किया कि एक महिला की मृत्यु के बाद, उसका बेटा - दूसरे पति का सौतेला बेटा - संपत्ति पर अपने उत्तराधिकार का दावा कर सकता है। यह फैसला तब लिया गया जब दूसरे मृतक पति के भतीजों और भतीजों के बेटों ने संपत्ति पर अपना हक जताया था।
खुद की कमाई संपत्ति के मामले में

कानून के हिसाब से एक बेटे का अपने माता-पिता की खुद से कमाई संपत्ति पर कानूनी अधिकार नहीं होता है। हालाँकि, वह अपना हिस्सा माँग सकता है अगर वह संपत्ति बनाने में अपना सहयोग साबित कर दे । इसके अलावा, एक बेटे के लिए माता-पिता की खुद से कमाई संपत्ति में हिस्सा पाने का कोई मौका नहीं होता है अगर उसके पिता ने अपनी वसीयत में संपत्ति किसी और को दी हो, या दस्तावेज़ बनाकर भेंट दी हो। उसके माता- पिता उसे संपत्ति का इस्तेमाल करने दे सकते हैं लेकिन माता- पिता पर इसके लिए कोई दवाब नहीं होगा। इसके अलावा, पोते का उसके दादा की खुद से कमाई संपत्ति  पर कोई अधिकार नहीं होता है।

अगर पिता संपत्ति उपहार में दें

एक संपत्ति को पैतृक संपत्ति नहीं माना जाता है अगर वह पिता ने अपने बेटे को उपहार में दी हो। इसलिए, एक व्यक्ति अपने दादा के द्वारा पिता को उपहार में दी गई संपत्ति में अपने हिस्से का दावा नहीं कर सकता । ऐसी संपत्ति जो बेटे या बेटी को पिता से उपहार के रूप में मिली हो, वह उनकी खुद से कमाई संपत्ति बन जाती है। ऐसे मामलों में, पोते/पोतियों का ऐसी संपत्ति पर कोई कानूनी अधिकार नहीं होता जिसे उनके दादा ने अपने बेटे या बेटी को उपहार में दी हो, जो वे किसी और व्यक्ति को भी दे सकते थे। जब तक दादा इसे अपनी इच्छा से पैतृक संपत्ति नहीं बनाते तब तक ऐसी संपत्ति को खुद  से कमाई हुई संपत्ति माना जा सकता है।क्या आपके पिता की संपत्ति में आपका अधिकार है?

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