सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत अब बेटे के साथ ही बहू और दामाद को भी बुजुर्ग की देखभाल के लिए जिम्मेदार बनाया गया है
जिन बुजुर्गो के इकलौते बेटे या बेटी का निधन हो गया या लापता हो गये उन बुजुर्गो की समाज मे उपेक्षा होती है और उनकी बहू या दामाद ना तो उनकी सेवा करते ना ही मेंटिनेंस देते और उन बुजुर्गो के समक्ष दर दर ठोकरे खाने के अलावा और कोई विकल्प नही था।
इस परेशानी को सरकार के संज्ञान में लाये जाने पर सरकार ने सीनियर सिटिजन ऐक्ट 2007 के तहत बुजुर्गों का ख्याल रखने वालों की परिभाषा में विस्तार करते हुए बच्चो के साथ ही बहू और दामाद को भी शामिल किया और बुजुर्ग की देखभाल और भरणपोषण के लिए जिम्मेदार बताया है।
मेंटिनेंस ऐंड वेलफेयर ऑफ पैरंट्स ऐंड सीनियर सिटिजन ऐक्ट 2007 में बदलाव का प्रस्ताव के मुताबिक, दामाद और बहु पर भी होगी अपने सास-ससुर की देखभाल की जिम्मेदारी।
अकेले रह रहे बुजुर्गों का सम्मान भी सुनिश्चित होगा
घर में अकेले बुजुर्गों की जिम्मेदारी सिर्फ बेटे ही नहीं, बल्कि बहू-दामाद, सौतेले बच्चों की भी होगी।
बुजुर्गों की देखभाल की परिभाषा तय करने वाले मेंटिनेंस ऐंड वेलफेयर ऑफ पैरंट्स ऐंड सीनियर सिटिजन ऐक्ट 2007 में माता-पिता और सास-ससुर को भी शामिल किया गया है, चाहे वे सिनियर सिटिजन हों या नहीं।
मेंटिनेंस ऐंड वेलफेयर ऑफ पैरंट्स ऐंड सीनियर सिटिजन ऐक्ट 2007 में अधिकतम 10 हजार रुपये मेंटिनेंस देने की सीमा को भी खत्म करने का प्रावधान शामिल हैं।
आदेश की पालना नही होने पर उन्हें 6 महीने कैद की सजा हो सकती है, जो अभी तीन महीने है।
देखभाल की परिभाषा में भी बदलाव कर इसमें घर और सुरक्षा भी शामिल किया गया है।
देखभाल के लिए तय की गई राशि का आधार बुजुर्गों, पैरंट्स, बच्चों और रिश्तेदारों के रहन-सहन के आधार पर किया जाएगा।
इसका मकसद बुजुर्गों के शारीरिक और मानसिक कष्ट में कमी आएगी और उनका सम्मान बढेगा।
संशोधन में 'सीनियर सिटीजन केयर होम्स' के पंजीकरण का प्रावधान है और केंद्र सरकार स्थापना, संचालन और रखरखाव के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करेगी।
बुजुर्गों तक पहुंच बनाने के लिए प्रत्येक पुलिस ऑफिसर को एक नोडल ऑफिसर नियुक्त करना होगा।
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